अपने घर के बड़े-बुजुर्गों से दुर्गापूजा के संबंध में किसी कहानी को सुनकर वर्तमान समय में उसकी समीक्षा करते हुए मित्र के पास पत्र लिखें ।

अनौपचारिक पत्र

दुर्गापूजा का उल्लेख करते हुए मित्र को पत्र

 

दिनाँक – 24 अक्टूबर 2024

 

लक्ष्मी निवास,
कनलोग,
शिमला- 171 001,

प्रिय मित्र सुमेश,
नमस्कार

मित्र आशा करता हूँ तुम अपने घर पर परिवार संग स्वस्थ होंगे। आप सब को दुर्गा पूजा की बहुत-बहुत बधाई। इस बार दुर्गा पूजा में मेरे दादा-दादी हमारे साथ ही थे और इस उपलक्ष्य में हमारे घर पर दुर्गा पूजा का विशेष आयोजन किया गया। दादा जी को तो सारी आध्यात्मिक कथाएँ कंठस्थ हैं, इसलिए दुर्गा पूजा और कथा का पाठ भी दादा जी ने खुद ही किया।

मित्र, दादा जी ने दुर्गा पूजा के दौरान एक कथा सुनाई, जिसे सुनकर मैं स्तब्ध रह गया क्योंकि वह कथा वर्तमान समय से भी सीधा मेल खा रही थी।

दादा जी ने बताया कि महिषासुर नाम का जो राक्षस था, उसने कई वर्षों की तपस्या की और ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान मांग लिया। ब्रह्मा जी ने भी उसकी तपस्या से प्रसन्न हो कर उसे अमरत्व की जगह वरदान दिया कि तेरी मृत्यु किसी स्त्री के हाथों ही होगी अन्यथा तुझे कोई मार ना सकेगा। यह वरदान पाकर उसने असुरों को साथ लेकर देवों के विरुद्ध ही युद्ध छेड़ दिया और उन्हें हरा दिया। ऐसा देख सभी देवताओं के अनुरोध पर भगवान शिव, ब्रह्मा और विष्णु जी ने अपनी शक्ति से देवी दुर्गा को जन्म दिया जिसने बाद में राक्षस महिषासुर को मौत के घाट उतारा और देवताओं को उसके आतंक से छुटकारा दिलाया।

मित्र, आज भी ऐसे महिषासुर भ्रष्टाचार रूपी राक्षस के रूप में गली-गली में घूम रहें है और हमारे देश की जड़ों को खोखला कर रहे हैं। गरीब दिन प्रति दिन गरीब होता जा रहा है और यह अपनी तिजोरियाँ भर रहे हैं क्योंकि इन भ्रष्टाचार रूपी राक्षसों ने बड़े-बड़े नेताओं के तलवे चाटकर बस वरदान ले रखा है और इसी वरदान के कारण बस वह इस देश का बर्बाद कर रहे हैं। आज इन राक्षसों की वजह से हमारे देश के नौजवान, पढ़ लिख कर भी घरों में बैठे हैं क्योंकि नौकरियाँ तो वह महिषासुर रूपी राक्षस भ्रष्टाचार कर हड़प रहे हैं।
अब तो बस एक ही उम्मीद करते हैं कि कोई दुर्गा रूपी शक्ति/व्यक्तित्व आए और इस भ्रष्टाचार रूपी राक्षस से इस देश को बचा ले, वरना यह हमारे समाज और देश का नामो निशान नहीं छोड़ेंगे।

बाकी सब ठीक है, तुम अपना ध्यान रखना और छुट्टियों में हो सके तो शिमला आ जाना।

तुम्हारा प्रिय मित्र,
विजेश,
खलिनी,
शिमला ।


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