अगर मेरे मामा का घर चाँद पर होता। (अनुच्छेद)

अनुच्छेद

यदि मेरे मामा का घर चाँद पर होता तो…

 

यदि मेरे मामा चाँद पर रहते तो फिर तो बात ही क्या थी । मैं तो हर रोज़ शाम को अपने मामा के घर ही चला जाता और खूब मज़े करता । सुना है चाँद पर पारियाँ रहती हैं, मैं वहाँ जाकर परियों के साथ दोस्ती कर लेता और खूब खेलता । चाँद पर बैठ कर झूला झूलता और सितारों को नजदीक से देखता। चाँद पर रहकर तो हम स्वस्थ रहते क्योंकि चाँद पर कोई प्रदूषण नहीं है। हमारी खूबसूरत धरती तो अब रहने लायक नहीं रही क्योंकि यहाँ पर चारों तरफ प्रदूषण ही प्रदूषण है । धरती पर तो अब हवा भी शुद्ध नहीं है । मामा के घर पर यानी की चाँद पर जाकर तो हम कम से कम ठंडी हवा का आनंद लेते । हम तो बचपन से ही चाँद को चंदा मामा कहते आ रहे हैं, यदि हमारे मामा का घर ही चाँद पर होता तो हमारे दो-दो मामा हो जाते। फिर तो बड़ मजा आता। यदि मेरे मामा का घर चाँद पर होता तो मैं अंतरिक्ष यात्री कहलाता क्योकि चाँद पर जाने के लिए अंतरिक्ष में यात्रा करनी पड़ती है।


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