अपने राजनीतिक विचारों में दीनदयाल उपाध्याय किसे ‘राष्ट्र की आत्मा’ कहते हैं? (1) चित्ति (2) संकल्प (3) एकात्म मानववाद (4) उपरोक्त में कोई नहीं

सही उत्तर है…

(1) चित्ति

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व्याख्या

दीनदयाल उपाध्याय के राजनीतिक विचारों में ‘चित्ति’ की अवधारणा महत्वपूर्ण स्थान रखती है, जिसे वे ‘राष्ट्र की आत्मा’ के रूप में वर्णित करते हैं। इस विचार की व्याख्या निम्नलिखित है:

‘चित्ति’ संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है चेतना या आत्मा। उपाध्याय जी के अनुसार, प्रत्येक राष्ट्र की एक विशिष्ट ‘चित्ति’ होती है, जो उसकी सांस्कृतिक पहचान, मूल्यों और आदर्शों का प्रतिनिधित्व करती है। यह राष्ट्र की वह आंतरिक शक्ति है जो उसके इतिहास, संस्कृति और लोगों के सामूहिक अनुभवों से निर्मित होती है।

उपाध्याय जी का मानना था कि एक राष्ट्र की प्रगति और विकास उसकी ‘चित्ति’ के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने भारत के संदर्भ में इस विचार को विशेष महत्व दिया, यह कहते हुए कि भारत की विकास नीतियाँ और राजनीतिक दर्शन भारतीय ‘चित्ति’ पर आधारित होने चाहिए, न कि पश्चिमी मॉडलों की नकल पर।

‘चित्ति’ की यह अवधारणा उपाध्याय जी के ‘एकात्म मानववाद’ के सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह विचार राष्ट्रीय पहचान, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और स्वदेशी विकास मॉडल के महत्व पर जोर देता है।

यह दृष्टिकोण आज भी भारतीय राजनीति और समाज पर प्रभाव डालता है, विशेष रूप से राष्ट्रवादी विचारधारा में, जहाँ भारतीय संस्कृति और मूल्यों के आधार पर विकास और नीति निर्माण पर बल दिया जाता है।


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