‘जब मैं कक्षा में प्रथम आया।’ इस विषय पर एक निबंध लिखिए।

निबंध

जब मैं कक्षा में प्रथम आया

 

कक्षा में प्रथम आने का अनुभव ही अलग होता है। जब मैं अपनी कक्षा में प्रथम आया था तो वह मेरा प्रथम अनुभव था, क्योंकि इससे पहले मैं कभी भी कक्षा में प्रथम नहीं आया था। कक्षा में प्रथम आने का मुख्य कारण मेरे द्वारा की गई जी तोड़ मेहनत और पढ़ाई थी, लेकिन इसके पीछे बहुत बड़ी प्रेरणा भी छुपी हुई थी।

पिछली परीक्षा में मैं फेल होते-होते रह गया था। मेरे बेहद कम अंक आए थे और मैं अनुकंपा के आधार पर पास हुआ था। जब मैं अपना रिजल्ट लेकर निराश भावना से अपने घर में घुसा, तब मेरे मन में बेहद डर था। मुझे अपने माता-पिता से पढ़ने वाली डांट का डर था। मुझे इस बात की चिंता थी कि मैं उनको क्या जवाब दूंगा।

जब मैं घर में घुसा तो मेरे माता-पिता दोनों घर में मौजूद थे। मैंने डरते डरते उनको रिजल्ट दिखाया और इससे पहले वे कुछ बोलते मैंने उनके पैरों में बैठकर रोने लगा। मुझे रोते देखकर वह घबरा गए और उन्होंने मुझे प्यार से समझाया कि रो क्यों रहे हो। अगर तुम्हारे कम अंक आए हैं तो तुम्हारी कमी के कारण आए हैं। हमें अगर किसी कार्य में असफलता मिलती है तो हमें हमारी किसी गलती के कारण ही असफलता मिलती है। हमें अपनी असफलता के कारणों को समझना चाहिए और उन गलतियों को सुधार का प्रयास करना चाहिए। इस परीक्षा में तुम्हारे बेहद कम अंक आए और तुम बड़ी मुश्किल से पास हो पाए। तुम्हे इस बात पर गौर करना होगा कि तुम पढ़ाई में इतना पीछे क्यों रह गए।

मेरे पिता ने मुझे बहुत देर से समझाया कि आप से ही एक नया शेड्यूल बना लो और उसी के अनुसार पढ़ाई करो। तुम अपने मन में यह संकल्प लो कि अगली परीक्षा में तुम्हे बेहद अच्छे अंको से उत्तीर्ण होना है। यदि हम मन में कुछ ठान लें और अपने संकल्प के अनुसार कड़ी मेहनत करें तो हमारा लक्ष्य हमें अवश्य मिलता है। अपने पिता की इन सकारात्मक बातों का मुझ पर असर हुआ और मैंने उसी दिन से पूरी लगन से पढ़ाई करनी शुरू कर दी। मैंने खेलना बिल्कुल ही कम कर दिया था और दिन में केवल आधा घंटा बाहर खेलने के लिए जाता था। मेरी मेहनत का ही यह परिणाम हुआ कि वार्षिक परीक्षा में मेरे सारे पेपर अच्छे हुए।

मुझे इतना विश्वास अवश्य था कि मेरे परीक्षा में अच्छे अंक आएंगे, लेकिन मुझे यह आशा नहीं थी कि मैं अपनी कक्षा में प्रथम आऊंगा। जब मुझे अपनी कक्षा में प्रथम आने का समाचार मिला तो मुझे स्वयं पर विश्वास नहीं हुआ। कक्षा में जब हमारे कक्षाध्यापक ने मेरे प्रथम आने की घोषणा की तो कक्षा के सभी छात्र-छात्राएं ताली बजाने लगे। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच में कक्षा में प्रथम आने का समाचार सुनकर मेरे मन में बेहद खुशी हो रही थी। यह मेरे जीवन का सबसे अनमोल पल था और मेरे जीवन की पहली बड़ी सफलता थी। जीवन की इस पहली बड़ी सफलता को मैं आज तक नहीं भूल पाया।


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