मेरी अंतरिक्ष यात्रा (निबंध)

निबंध

मेरी अंतरिक्ष यात्रा

 

भूमिका

अंतरिक्ष के प्रति सभी लोगों का आकर्षण रहा है और बहुत से लोग ऐसे हैं, जो अंतरिक्ष जाना चाहते हैं। लेकिन अंतरिक्ष जाना हर किसी के बस की बात नहीं और हर किसी के लिए संभव नहीं है। यहां पर मेरी अंतरिक्ष यात्रा से संबंधित एक सुंदर सा निबंध प्रस्तुत है।

निबंध

मुझे शुरु से ही अंतरिक्ष के प्रति एक जिज्ञासा रही है। मेरा मैं शुरू से ही यह सपने देखता था कि मैं अंतरिक्ष की सैर कर रहा हूँ। मुझे पृथ्वी के बाहर के संसार में झांकने की जिज्ञासा रही है। हमेशा यही सपने देखते रहने के कारण हमेशा मेरे मन में अंतरिक्ष और पृथ्वी के बाहर के ग्रह आदि ही घूमते रहते थे। मैंने तय कर लिया था कि मैं अंतरिक्ष यात्री (एस्ट्रोनॉट) बनूंगा और पृथ्वी के बाहर अंतरिक्ष की सैर करूंगा। इसीलिए  रोज अंतरिक्ष से संबंधित किताबें पढ़ता और पत्रिकाएं पढ़ता, फिल्में और टीवी प्रोग्राम देखता ताकि मैं अधिक से अधिक अंतरिक्ष के विषय में जान सकूं।

एक दिन मैंने निश्चय कर लिया था बड़ा होकर अंतरिश्र यात्री ही बनूंगा। एक दिन यात्रा से संबंधित फिल्म देखते-देखते मैं सो गया और फिर मैं सपने में अंतरिक्ष की सैर करने लगा। मैंने देखा कि मैं बड़ा हो गया हूं और मैंने वैज्ञानिक के रूप में भारत के इसरो संस्थान को ज्वाइन कर लिया है। भारत अपना एक बड़ा अंतरिक्ष कार्यक्रम चलाने वाला है।

वह अंतरिक्ष पर एक और यान भेजने वाला है। अंतरिक्ष यात्री के रूप में 5 लोगों का चयन किया गया है। उन 5 लोगों में मेरा भी नाम आ गया है। मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। लगभग छः महीने तक हम लोगों की ट्रेनिंग हुई और हम लोगों को अंतरिक्ष में रहने लायक वातावरण के अभ्यस्ता बनाया गया।

छः महीने बाद हम लोग अंतरिक्ष यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार हो गए थे। अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण की भी तैयारी हो चुकी थी। हम सब लोग तैयार हो गए स्पेस सूट पहनकर अपने अंतरिक्ष यान मे बैठ गये। यह बड़ा ही रोमांचकारी अनुभव था। यान के प्रक्षेपण होते ही रॉकेट ने पृथ्वी की कक्षा को छोड़ दिया और अंतरिक्ष की ओर बढ़ चला। अंतरिक्ष में एक पहले से निश्चित कक्षा में हमारा यान रॉकेट अलग हो गया और अंतरिक्ष यान पृथ्वी के चक्कर लगाने लगा। अपने यान से पृथ्वी को देखने पर एक नीला सुंदर ग्रह दिख रही थी। यह बड़ा ही सुंदर दृश्य था।

हमारी पृथ्वी बड़ी ही सुंदर दिख रही थी। आसपास चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था और दूर-दूर अलग-अलग रहे छोटे छोटे ग्रह दिखाई दे रहे थे। हम लोग यान में सही से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे, क्योंकि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं था। इस कारण हम यान में तैर कर अपने कार्य कर रहे थे। यहाँ तक कि हमारा खाना और पानी भी यान में तैर रहा था और उसे हमें पकड़-पकड़ कर खाना पड़ रहा था। हमें अपने यान में 5 दिन बिताने थे और वहां की सारी रिपोर्ट नीचे अंतरिक्ष एजेंसी में भेजने थी।

हममें ऐसे ही अंतरिक्ष का अध्ययन करते हुए 5 दिन बिताए और अंतरिक्ष के अलग-अलग अनुभव किये। 5 दिन पूरा होते ही हमारा वापस पृथ्वी की कक्षा में लैंड करा दिया गया और हम अपनी अंतरिक्ष एजेंसी में सफलतापूर्वक वापस आ गए। हमारी सफल अंतरिक्ष यात्रा सफल रही। अंतरिक्ष एजेंसी ने जिस काम के लिये हमे भेजा था, हमारा वह काम पूर्ण हुआ। हमें अपने देश की तरफ से सफल अंतरिक्ष अंतरिक्ष यात्रा के लिए पुरस्कृत भी किया गया।

मैं जब पुरुस्कार लेने स्टेज पर जा रहा था, तभी अचानक मेरी नींद खुल गई और तब मुझे पता चला कि ये एक सपना था। लेकिन मैंने निश्चय कर लिया था कि अपने सपने को पूरा अवश्य करना है। अंतरिक्ष यात्री बन कर अपने देश का नाम रोशन करना है और अंतरिक्ष यात्रा का पुरस्कार भी लेना है।


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