राजनीति का अपराधीकरण (निबंध)

निबंध

राजनीति का अपराधीकरण

 

राजनीति का अपराधीकरण : राजनीति में अपराधीकरण आज की एक ज्वलंत समस्या बन गई है। इस कारण राजनीति बेहद दूषित हो चली है। आज की राजनीति आज जनता की हितों में न होकर नेताओं द्वारा अपने स्वार्थों की पूर्ति का माध्यम बन कर रह गई है और अपराधियों का अखाड़ा बनकर रह गई है। राजनीति के अपराधीकरण पर निबंध प्रस्तुत है…

प्रस्तावना

राजनीति का अपराधीकरण आज के समय में एक सामान्य बात हो कर रह गई है। आज अपराधियों के लिए राजनीति सबसे सुरक्षित जगह बन गई है। राजनीति एक समय में राजनीति को सेवा का क्षेत्र माना जाता था और इस क्षेत्र में केवल वही लोग आते थे, जिनके मन में समाज के प्रति सेवा की भावना होती थी। जिनका चरित्र उज्जवल होता था और जो सच्चे मन से जनता की सेवा करना चाहते थे, वही लोग राजनीति में आते थे।

भारत की आजादी के बाद कुछ समय तक यही स्थिति रही उसके बाद राजनीति में अपराधी लोगों का प्रवेश होने लगा और राजनीति का स्वरूप बिगड़ता चला गया। बाहुबल, धनबल आदि का प्रयोग राजनीति में धड़ल्ले से होने लगा। इसी कारण राजनीति में ऐसे गलत लोगों का प्रवेश हो चुका है, जिससे देश की विकास प्रभावित हो रहा है। ये लोग ढेर सारा धन कमाने के लिए ही राजनीति में आते हैं। जनता की सेवा करने से उनका कोई लेना देना नहीं होता।

राजनीति का अपराधीकरण

राजनीति में अपराधियों की बढ़ती संख्या अब बेहद चिंतनीय विषय बनती जा रही है। आज ऐसे सांसदों या विधायकों का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है, जिनके ऊपर किसी ना किसी रूप में कोई ना कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज होता है। आज ऐसा कोई भी राजनीतिक दल नहीं रह गया है, जिसमें अपराधी प्रवृत्ति के लोग नेता बन कर ना घूम रहे हों।

बड़ी-बड़ी स्वच्छता स्वच्छता आदि की दुहाई देने वाले सभी राजनीतिक दल अपराधियों को टिकट देने से नहीं चूकते।राजनीति अपराधियों का जमावड़ा बनती जा रही है। अपराधियों को अपने अपराधों को संरक्षित करने के लिए राजनीति एक सबसे सही मंच लग रहा है, जहाँ वह अपनी अपराधों के लिए ढाल बना लेते हैं।

अपराधी प्रवृत्ति के लोग रॉबिनहुड का दर्जा हासिल कर लेते हैं। वह गलत तरीकों से धन कमा कर थोड़ा बहुत धन गरीबों आदि में बांटकर उनकी सहानुभूति हासिल कर लेते हैं और इसी सहानुभूति के आधार पर वे राजनीति में प्रवेश कर चुनाव जीत जाते हैं। जब वह नेता बन जाते हैं तो अपना असली रंग दिखाने लगते हैं और धीरे-धीरे देश को खोखला करने में लग जाते हैं।

अपराधी अपराध करने से कभी नहीं बाज आते। यही बात राजनीति में प्रवेश करने वाले अपराधियों के संदर्भ में भी होती है। वे अपराथ करने की प्रवृत्ति से बाज नहीं आते और राजनीति में आने के बाद उन्हें और अधिक शक्ति प्राप्त हो जाती है और घोटाले करते हैं। इसका सीधा असर जनता पर पड़ता है क्योंकि वह देश को खोखला करते हैं और विकास के कार्य के लिए लगने वाला धन स्वयं डकार जाते हैं, जिससे देश का विकास नही हो पाता। जब राजनीति में अपराधियों का प्रवेश निरंतर बढ़ता जा रहा था, तभी बीच में कुछ सार्थक कदम उठाने का भी प्रयत्न किए गए थे।

अदालतों ने अपराधियों के राजनीतिक प्रवेश पर अंकुश लगाने के लिए कुछ सख्त कदम उठाये और सरकारों द्वारा भी कुछ ऐसे नए कानून बनाए गए हैं, जिससे राजनीति में अपराधियों के प्रवेश पर कुछ-कुछ लगे। एक कानून के अनुसार अब ऐसा व्यक्ति जो किसी अपराधिक मामले में सजा पा जाता है तो वो चुनाव के लड़ने योग्य नहीं रहता और उस पर आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लग जाता है। ये एक सार्थक कदम है। इससे सजा पाने वाला अपराधी हमेशा के लिए चुनाव से वंचित हो जाएगा और ऐसे व्यक्तियों का राजनीति में प्रवेश कम हो पाएगा।

हालांकि सरकार और अदालत को ऐसा कानून भी बनाना चाहिए कि यदि किसी व्यक्ति पर अपराधिक मामला है, तो उसको उस समय ही चुनाव लड़ने पर रोक लग जानी चाहिए और यदि उस पर अपराध सिद्ध हो जाता है तो उसे हमेशा के लिए चुनाव से वंचित कर देना चाहिए। यदि अपराध सिद्ध नहीं होता है, तब ही वह चुनाव लड़ सकता है, क्योंकि भारत की न्याय प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चलती है।

अपराधियों पर अपराध के मामले सालों साल तक चलते रहते हैं और इस पूरी अवधि में अपराधी व्यक्ति राजनीति में प्रवेश कर उसकी सुविधा का पूरा लाभ उठा लेते हैं। अमूमन उन्हें इतनी देर होने पर उन्हें सजा भी नही होती और अगर सजा होती भी है, तो सजा मिलने में बहुत देर हो चुकी होती है, और वह अपना पूरा जीवन चुके होते हैं। इससे अपराधी प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों के लिए राजनीति में रोकने के लिए कोई औचित्य नही रह जाता।

उपसंहार

आज ईमानदार एवं साफ-सुथरी वाले लोगों की इस देश की जरूरत है, जो इस देश की बागडोर को संभाले, तभी देश विकास के पथ पर आगे बढ़ सकेगा। आपराधिक प्रवृत्ति वाले नेता लोग देश का कभी भला नहीं कर सकते। वह देश को पूरी तरह बर्बाद कर देंगे, इसलिए हमें इस दिशा में और अधिक सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

सरकार के स्तर पर सरकार और न्यायालय दोनों को सख्त कानून और अधिक सख्त कानून बनाने चाहिए। जनता के स्तर पर बात करें तो जनता को भी जागरूक होकर ऐसे व्यक्तियों को बिल्कुल भी नहीं देना चाहिए जो ऐसे किसी भी अपराधिक छवि वाले व्यक्ति को बिल्कुल भी वोट न दें। इससे ऐसे लोगों का हौसला पस्त होगा।


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