वाणी मनुष्य के लिए परमात्मा का एक अनुपम वरदान है। इस वरदान के कारण ही मनुष्य सचमुच मनुष्य है । यह वरदान एक अभिशाप भी बन सकता है, यदि इसका उपयोग समझ कर नही किया जाय तो । बिना सोच-विचार के मुह से निकले शब्द अनर्थ कर सकते हैं। इसीलिए यह परामर्श दिया गया है कि देखो और सुनों अथिक और बोलो कम । प्रश्नः 1. वाणी का वरदान किसे प्राप्त हुआ ? प्रश्नः 2. वरदान अभिशाप कब बन सकता है ? प्रश्नः 8. शब्द अनर्थ कैसे होते हैं ? प्रश्नः 9. गद्यांश में युग्म शब्द पहचान कर लिखिए । प्रश्नः 10. उपयुक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए ।

वाणी मनुष्य के लिए परमात्मा का एक अनुपम वरदान है। इस वरदान के कारण ही मनुष्य सचमुच मनुष्य है । यह वरदान एक अभिशाप भी बन सकता है, यदि इसका उपयोग समझ कर नही किया जाय तो । बिना सोच-विचार के मुह से निकले शब्द अनर्थ कर सकते हैं। इसीलिए यह परामर्श दिया गया है कि देखो और सुनो अधिक  और बोलो कम ।

 

प्रश्नः 1. वाणी का वरदान किसे प्राप्त हुआ ?
उत्तर : वाणी का वरदान मनुष्य के लिए प्राप्त है।

प्रश्नः 2. वरदान अभिशाप कब बन सकता है ?
उत्तर : वरदान तब अभिशाप बन जाता है, जब उस वरदान का उपयोग सोच-समझ कर सार्थक और सकारात्मक उपयोग नही किया जाये।

प्रश्नः 3. शब्द अनर्थ कैसे होते हैं ?
उत्तर : बिन सोचे-समझे बोले गए शब्द अनर्थ बन जाते है। जब हम कोई बात बिना सोचे-समझे बात के परिणाम के अच्छे-बुरे पर विचार किए बिना शब्दों को बोल देते हैं, तो वे शब्द अनर्थ बन जाते हैं।

प्रश्नः 4. गद्यांश में युग्म शब्द पहचान कर लिखिए ।
उत्तर : गद्यांश में शब्द युग्म इस प्रकार होंगे…
शब्द युग्म ⇒ सोच-विचार

प्रश्नः 5. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए ।
उत्तर : उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक होगा, ‘वाणी का प्रभाव


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