‘गा-गाकर बह रही निर्झरी, पाटल मूक खड़ा तट पर है’ पंक्ति में अलंकार है।

“गा-गाकर बह रही निर्झरी, पाटल मूक खड़ा तट पर है”

अलंकार भेद : अनुप्रास अलंकार है।

स्पष्टीकरण :

“गा-गाकर बह रही निर्झरी, पाटल मूक खड़ा तट पर है” इस पंक्ति अनुप्रास अलंकार इसलिए है क्योंकि इस पंक्ति में  ‘ग’ वर्ण की दो बार आवृत्ति हुई है।

अनुप्रास अलंकार में किसी काव्य में किसी शब्द प्रथम वर्ण की एक से अधिक बार आवृ्त्ति होती है। इस काव्य पंक्ति में ‘गा-गाकर’ इस शब्द में ‘ग’ वर्ण की दो बार आवृत्ति हुई है।अनुप्रास अलंकार’ की परिभाषा के अनुसार जब किसी काव्य पंक्ति में किसी शब्द के प्रथम वर्ण की एक से अधिक बार पुनरावृति हो तो वहां पर ‘अनुप्रास अलंकार’ प्रकट होता है।

दूसरे नियम के अनुसार जब किसी समान शब्द की किसी काव्य पंक्ति में अनेक बार समान अर्थ में पुनरावृति हो तो भी वहाँ पर ‘अनुप्रास अलंकार’ प्रकट होता है।


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