जीवों के प्रति राहुल कैसा भाव प्रकट करता है? (माँ कह एक कहानी- मैथिलीशरण गुप्त) ​

मैथिलीशरण गुप्त की कविता ‘माँ कह एक कहानी’ को पूरा पढ़ने के बाद, राहुल के जीवों के प्रति भाव को इस प्रकार समझा जा सकता है…

राहुल जीवों के प्रति अत्यंत संवेदनशील और दयालु दृष्टिकोण रखता है। कविता में वर्णित कहानी में, जब एक हंस को तीर से घायल कर दिया जाता है, तो राहुल की प्रतिक्रिया इसे ‘करुणा भरी कहानी’ कहकर व्यक्त होती है। यह उसकी जीवों के प्रति सहानुभूति को दर्शाता है।

राहुल तू निर्णय कर इसका, न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय जय हो जिसका, सुन लूँ तेरी बानी”
“माँ मेरी क्या बानी? मैं सुन रहा कहानी।

राहुल न्याय और दया के बीच एक संतुलन चाहता है। जब उसकी माँ उससे पूछती है कि वह किसका पक्ष लेता है – शिकारी का या पक्षी के रक्षक का, तो राहुल का उत्तर स्पष्ट रूप से जीव-रक्षा के पक्ष में होता है। वह कहता है, ‘कोई निरपराध को मारे तो क्यों अन्य उसे न उबारे?’ यह वाक्य उसकी निर्दोष जीवों की रक्षा करने की इच्छा को दर्शाता है।

कोई निरपराध को मारे तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी।”
“न्याय दया का दानी! तूने गुनी कहानी।”

राहुल न्याय को दया से जोड़ता है। वह कहता है, ‘रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी।’ यहाँ वह स्पष्ट करता है कि उसके लिए सच्चा न्याय वह है जो दया पर आधारित हो। वह मानता है कि निर्दोष जीवों की रक्षा करना और उन्हें बचाना न्यायसंगत है।

इस प्रकार, कविता से स्पष्ट होता है कि राहुल जीवों के प्रति गहरी करुणा, संरक्षण की भावना, और न्यायपूर्ण व्यवहार का समर्थन करता है। वह जीवों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को महत्व देता है, जो उसके उदात्त और संवेदनशील चरित्र को प्रकट करता है।

‘माँ कह एक कहानी’ कविता राष्ट्रकवि ‘मैथिलीशरण गुप्त ‘द्वारा रचित एक मर्मस्पर्शी कविता है। ये कविता गौतम बुद्ध, उनकी पत्नी यशोधरा और पुत्र राहुल को आधार बनाकर लिखी गई है। इस कविता के माध्यम से कवि ने जीवों के प्रति दया और करुणा का भाव अपनाने को महत्व दिया है।


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