‘बड़े घर की बेटी’ कहानी के पात्र ‘बेनी माधव’ का चरित्र-चित्रण कीजिए।

‘बड़े घर की बेटी’ कहानी मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई एक सामाजिक कहानी है। इस कहानी में 4 पात्र प्रमुख हैं, जिनमें घर के मुखिया ‘बेनी माधव’, उनके दो पुत्र ‘श्रीकंठ सिंह’ एवं ‘लाल बिहारी सिंह’ तथा बड़े बेटे की पत्नी ‘आनंदी’ है। ‘आनंदी’ ही इस कहानी की सबसे प्रमुख पात्र थे। बेनी माधव घर के मुखिया हैं।

‘बेनी माधव’ का चरित्र-चित्रण चरित्र चित्रण इस प्रकार है :

  • बेनी माधव किसी समय में अपने गौरीपुर गाँव के जमींदार थे लेकिन धीरे-धीरे उनकी संपन्नता खत्म हो गई थी और वह अब एक साधारण व्यक्ति ही रह चुके थे।
  • अब उनमें जमींदारों वाले ठाठ बाट नहीं थे। उनका अधिकतर समय और संपत्ति मुकदमा और कचहरी में अलग-अलग वाद-विवादों में खर्च होता।
  • बेनी माधव के दो बेटे थे। बड़े बेटे का नाम श्रीकंठ तथा छोटे बेटे का नाम लाल बिहारी सिंह था।
  • बेनी माधव का स्वभाव मध्यम स्तर का था। ना तो वे बेहद अधिक तीखे या क्रोधी स्वभाव के थे और ना ही बहुत अधिक विनम्र स्वभाव के थे।
  • उस समय की सामाजिक पृष्ठभूमि के अनुसार बेनी माधव के अंदर भी पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता थी। इसी कारण बहू आनंदी पर ने जब विद्रोह किया तो उनके अंदर का पुरुष उभर आया और अपनी बहू आनंदी का जगह बेटे लाल बिहारी सिंह का साथ दिया। हालाँकि इससे पूर्व वह अपनी बहू आनंदी का बेहद सम्मान करते थे।
  • भले ही घर में कुछ भी विवाद रहा हो वह अपनी बहू आनंदी का सम्मान करते थे। उन्होंने कभी भी अपनी बहू आनंदी को भला-बुरा नही की।
  • विवाद होने पर लाल बिहारी सिंह का अधिक साथ दिया क्योंकि वे अपनी बहू की अपेक्षा बेटे को अधिक प्राथमिकता देते थे।
  • बेनी माधव आपसे एक समझदार व्यक्ति भी थे और पारिवारिक झगड़ों को समझदारी से मिटाने में यकीन रखते थे। इसी कारण आनंदी और लाल बिहारी सिंह के बीच विवाद के कारण जबसे श्रीकंठ सिंह भड़क गया और उसने लाल बिहारी सिंह को घर छोड़ जाने का हुकुम सुनाया तो वह श्रीकंठ को समझाने का प्रयास करते रहे ताकि घर का विवाद घर में ही निपट जाए।
  • बेनी माधव ने लाल बिहारी सिंह और आनंदी के बीच विवाद में अपने छोटे बेटे लाल बिहारी का साथ दिया लेकिन वह अपने बड़े बेटे श्रीकंठ सिंह का भी सम्मान करते थे।
इस तरह बेनी माधव बड़े ‘घर की बेटी कहानी’ में बेनी माधव एक मिश्रित स्वभाव वाले व्यक्ति थे जो ना बहुत अधिक अच्छे थे और ना ही बहुत अधिक बुरे थे।

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