तताँरा-वामीरो का चरित्र-चित्रण कीजिए। (तताँरा-वामीरो की कथा)

तताँरा-वामीरो का चरित्र-चित्रण

तताँरा-वामीरो की कथा’ कहानी ‘लीलाधर मंडलोई’ द्वारा लिखी गई कथा है, जिसमें उन्होंने तताँरा-वामीरो नामक एक प्रेमी युगल के बीच उपजे प्रेम तथा उन दोनों के मिलन ना होने के कारण दोनों के द्वारा अपनी जान गवां देने की मार्मिक कथा का वर्णन किया है। यह कथा तताँरा और वामीरो पर आधारित है। तताँरा एवं वामीरो इस कहानी के मुख्य पात्र हैं। तताँरा-वामीरो का चरित्र चित्रण इस प्रकार है :

तताँरा का चरित्र-चित्रण

तताँरा एक वीर एवं साहसी युवक है। वह बेहद परिश्रमी युवक था और सदैव हर किसी की मदद के लिए तैयार रहता था। उसका व्यक्तित्व एवं उसका स्वभाव बेहद आत्मीय था। अपने इसी विनम्र एवं आत्मीय स्वभाव के कारण उसके गाँव तथा आसपास के गाँव के सभी लोग उससे मिलना चाहते थे और उसके निकट रहना चाहते थे। तताँरा के बारे में यह मान्यता प्रचलित थी कि वह दैवीय शक्ति से युक्त युवक है। वह अपनी कमर में सदैव लकड़ी की तलवार बांधे रखता था। इसके बारे में लोगों का मत यह था कि यह लकड़ी की तलवार कोई अद्भुत दैवीय शक्ति युक्त है। तताँरा के कारनामों और उसकी दैवीय शक्ति से युक्त तलवार के कारण वह गाँव में एक लोकप्रिय युवक था। उसके अंदर प्रेम की भावना भी कूट-कूट कर भरी थी। इसी कारण वामीरो को पहली नजर में देखने पर ही उसे वामीरों से तुरंत प्रेम हो गया था। वह वामीरो की मधुर आवाज और सुरीले गायन का दीवाना हो गया था। वामीरो से प्रेम की खातिर उसने प्राण तक त्याग दिए।

वामीरो का चरित्र-चित्रण

वामीरो और एक बेहद सुंदर युवती थी। वह बहुत मधुर गाना गाती थी। वह अक्सर समुद्र के किनारे जाकर वहाँ बैठकर गाया गाया करती थी। उसके अंदर भी प्रेम की भावना थी इसी कारण पहली मुलाकात में उसका मन भी तताँरा की ओर खिंचा चला गया था। हालाँकि अपने मन की भावना उसने तुरंत प्रकट नही की और ऊपरी तौर पर तताँरा के प्रति रुखा व्यवहार प्रकट किया था। लेकिन वह मन ही मन तताँरा से प्रेम करने लगी थी। जब तताँरा द्वारा उसके न मिल पाने के दुख में अपने प्राण त्याग दिए तो वामीरो भी तताँरा के दुख में पागल हो गई। उसने तताँरा के गम में खाना-पीना सब त्याग दिया और एक दिन कहीं गुम हो गई। इस तरह ‘तताँरा-वामीरो की कथा’ कहानी में तताँरा और वामीरो दोनो एक-दूसरे से बेहद प्यार करने वाला युवक-युवती थे।

संदर्भ पाठ

“तताँरा वामीरो की कथा”, लेखक – लीलाधर मंडलोई

‘तताँरा वामीरो की कथा’ नामक पाठ लीलाधर मंडलोई द्वारा लिखित कहानी है। ये कहानी निकोबार द्वीप समूह के अलग-अलग गाँवों में रहने वाले दो युवक-युवती ‘तताँरा’ और ‘वामीरो’ के प्रेम और त्याग पर आधारित कहानी है। एक दूसरे से प्रेम होने के बावजूद दोनों का विवाह नहीं हो सका क्योंकि दोनों अलग-अलग गाँवों के रहने वाले थे। निकोबार द्वीप समूह के गाँवों में उस समय ये प्रथा प्रचलित थी कि अलग-अलग गाँवों के युवक-युवती आपस में विवाह नही कर सकते। एक दूसरे से मिलन न होने पाने के दुख में दोनों ने अपने प्राण त्याग दिए। ये उनके त्यागमयी  बलिदान की प्रेमकथा है।


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