“हरषे सकल भालु कपि ब्राता” – यहाँ ‘ब्राता’ का अर्थ है : (क) बात (ख) भाई (ग) समूह (घ) बाराती

इस प्रश्न का सही विकल्प होगा :

(ग) समूह

विस्तार से समझे कैसे?

‘श्रीराम चरित मानस’ की चौपाई की इन पंक्तियों में ‘ब्राता’ का अर्थ ‘समूह’ से है। भालू और बंदरों के भालू-कपि ब्राता अर्थात बंदर-भालू का समूह कहा गया है। पूरी चौपाई इस प्रकार है,

हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।
कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा।।

अर्थात प्रभु श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण को अपने हृदय से लगाकर गले मिले। दोनों भाइयों का यह मिलन देखकर समस्त भालू और बंदरों के समूह हर्षोल्लास से भर गए। उसके बाद उपचार के उपरांत हनुमान जी ने वैद्य को उसी जगह पर वापस सकुशल पहुंचा दिया, जहाँ से वह उन्हें लेकर आए थे।

विशेष

यह चौपाइयां गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस के लंका कांड से ली गई हैं। राम और रावण की सेना के बीच युद्ध में जब लक्ष्मण रावण के पुत्र मेघनाथ के वाणों से घायल होकर मूर्छित हो गए और उनके प्राणों पर संकट आ गया। तब उनके उपचार के लिए हनुमान जी लंका जाकर सुषेण वैद्य को लेकर आए।

सुषेण वैद्य ने लक्ष्मण को देखकर उनके लिए संजीवनी बूटी औषधि का प्रबंध करने के लिए कहा। तब हनुमान हिमालय पर्वत जाकर संजीवनी बूटी लेकर आए और उस संजीवनी बूटी से सुषेण वैद्य ने लक्ष्मण का उपचार किया और लक्ष्मण स्वस्थ होकर उठ खड़े हुए। लक्ष्मण को स्वस्थ देख प्रभु श्री राम हर्षितसुशील बेड को लेकर आए थे हर्ष से भर उठे और उन्होंने हर्षविभोर होकर अपने भाई लक्ष्मण को गले से लगा लिया।

दोनों भाई राम और लक्ष्मण के सुंदर मिलन को देखकर आसपास के सभी वानर और भी भालू भी हर्षोल्लास से भर उठे। उसके बाद श्री हनुमान वैद्य को सम्मानपूर्वक उसी जगह पहुंच आए जहां से उन्हें लेकर आए थे।


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