‘गिल्लू’ पाठ में लेखिका की मानवीय संवेदना अत्यंत प्रेरणादायक है । टिप्पणी लिखिए ।

‘गिल्लू’ पाठ में मानवीय संवेदना अत्यंत प्रेरणादायक रही है, क्योंकि इस पाठ में लेखिका ने एक ऐसे नन्हे एवं निरीह जीव के प्रति मानवीय संवेदना का प्रदर्शन किया था, जो बेहद संकट की स्थिति में था और लेखिका ने उसे संकट से बचाया था। लेखिका द्वारा गिल्लू के प्रति मानवीयता वाला व्यवहार करना उनके पशु पक्षियों के प्रति मानवीय संवेदना का प्रत्यक्ष प्रमाण रहा है।

लेखिका महादेवी वर्मा पशु प्रेमी रही हैं। उन्होंने अपने पशु प्रेम से संबंधित अनेक संस्मरण लिखे हैं। ‘गिल्लू’ पाठ भी उनके संस्मरणों का एक हिस्सा है। गिल्लू एकसी गिलहरी का बच्चा था, जो लेखिका के घर के आंगन में घायल अवस्था में लेखिका को मिला था। कौओं गिलहरी के बच्चे को घायल कर दिया था और लेखिका ने उस गिलहरी के बच्चे की जान बचाई और ‘गिल्लू’ नाम दिया। एक अन्जान से निरीह प्राणी को इतनी आत्मीयता से रखना, उसकी जान बचाना, उसका उपचार करना और फिर उसे पालना-पोसना, यह लेखिका की मानवीय संवेदना की पराकाष्ठा थी। हमें भी अपने आसपास के बेजुबान प्राणियों के प्रति करनी ऐसी ही संवेदना रखनी चाहिए।

‘गिल्लू’ पाठ पाठ ‘महादेवी वर्मा’ द्वारा लिखा गया एक संस्करणात्मक पाठ है, जिसमें उन्होंने अपने घर में पाली जाने वाली एक निरीह गिलहरी का वर्णन किया है। इस गिलहरी को उन्होंने बेहद घायल अवस्था में जान से बचाया था और उसका उपचार कर उसे ठीक किया। उसके बाद उन्होंने उस गिलहरी को पाल लिया और उसका गिल्लू नाम दिया।


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