लेखिका व गिल्लू के आत्मिक संबंधों पर प्रकाश डालिए।

गिल्लू और लेखिका के बीच बेहद गहरा आत्मिक और स्नेहिल संबंध विकसित हो चुका था। लेखिका महादेवी वर्मा और गिलहरी गिल्लू दो अलग-अलग जाति (मनुष्य जाति और पशु जाति) के प्राणी होने के बावजूद एक दूसरे के मन के भावों को बेहद कुशलता से समझ लेते थे।

एक वर्ष की अवधि के अंदर ही लेखिका और गिल्लू के बीच ऐसा संबंध विकसित हो गया कि गिल्लू हमेशा लेखिका के साथ ही खाना खाता और उनके साथ ही खेलता रहता था। वह कभी लेखिका के हाथ तो कभी पैरों पर चढ़ जाता तो कभी सिर पर चढ़कर खेलने लगता।

वह अपनी सुलभ हरकतों द्वारा लेखिका को आकर्षित करने का प्रयास करता था। वह लेखिका के प्रति अपनी स्वामिभक्ति का भी प्रदर्शन करता रहता था। जब एक बार लेखिका बीमार पड़ी तो गुल्लू ने भी अपना भोजन छोड़ दिया। वह बीमार लेखिका के सिरहाने बैठकर उनके सर और बालों को सहलाता रहता था।

लेखिका भी गिल्लू पर अपना परम स्नेह और ममता लुटाया बरसाया करती थीं। वह भी गिल्लू का सदैव ध्यान रखती। जब गिल्लू कमरे की खिड़की की जाली पर बैठकर बाहर की दुनिया देखता तो लेखिका के मन में यह विचार उत्पन्न हुआ कि शायद वह अपनी स्वतंत्रता पाना चाहता हो और बाहरी दुनिया से घुलना-मिलना चाहता हो। इसी कारण उन्होंने खिड़की की जाली का एक कोना खोल दिया था, जिससे गिल्लू आराम से उस जाली से बाहर निकाल कर बाहर घूमता-फिरता और फिर वापस कमरे में आ जाया करता था।

इस तरह उसने बाहरी संसार का भी भरपूर आनंद उठाया और लेखिका के साथ भी बना रहा। यह सारी बातें गिल्लू और लेखिका के बीच के आत्मिक और स्नेहिल संबंध को प्रकट करती हैं।

संदर्भ पाठ (गिल्लू – महादेवी वर्मा)

‘गिल्लू’ पाठ लेखिका ‘महादेवी वर्मा’ द्वारा लिखा गया एक संस्मराणत्मक पाठ है, जिसमें लेखिका  ने अपने घर की एक पालतू गिलहरी गिल्लू के बारे वर्णन किया है। गिल्लू गिलहरी को लेखिका ने मरने से बचाया था और फिर उसका उपचार किया। जिससे जब गिल्लू गिलहरी स्वस्थ हो गया तो वह लेखिका के पास ही रहने लगा।


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