हमें वीरों से क्या सीखना चाहिए? (कविता – वीरों को प्रणाम)

‘वीरों को प्रणाम’ कविता में हमें वीरों से अपनी स्वाधीनता के महत्व का सम्मान करना सीखना चाहिए। ‘वीरों को प्रणाम‘ कविता में यह बताया गया है कि हमें जो स्वाधीनता मिली है, वह यूँ ही भीख में नहीं मिली बल्कि इसके लिए हमारे पूर्वजों ने अपने जीवन का बलिदान किया है। कवि ये भी कहते हैं कि आज जब हम अपने देश में सुरक्षित बैठे हुए चैन की नींद सोते हैं तो यह भी देश की सीमाओं पर रक्षा के लिए दिन-रात लगे हमारे सैनिकों के कारण भी संभव हो पाया है।

हमारे वीर पूर्वज जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमारे लिए स्वतंत्रता प्राप्त की, इन वीरों से हमें यह सीखना चाहिए कि कोई भी चीज भीख में नहीं मिलती। उसके लिए अपनी जान की बाजी लगानी पड़ती है। हमें वीरों से ये सीखना चाहिए कि देश की स्वाधीनता देश के सम्मान के लिए अपने प्राणों को उत्सर्ग करने में संकोच नहीं करना चाहिए। जो अपने देश के सम्मान के लिए मर मिटने को तैयार रहते हैं, वही वीर कहलाते हैं, उनका नाम इतिहास में सदैव अमर हो जाता है। ऐसे वीरों को ही आने वाली पीढ़ियां बार-बार प्रणाम करती हैं, इसीलिए हमें न केवल अपनी स्वाधीनता का सम्मान करना चाहिए बल्कि इसे बरकरार रखने के लिए हर संभव प्रयत्न करना चाहिए। देश के सम्मान पर यदि कोई आज आए तो हमें अपने देश के सम्मान की रक्षा करने के लिए पीछे नहीं हटना चाहिए और यदि आवश्यकता पड़े तो अपने प्राणों को न्योछावर करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

विशेष
‘वीरों को प्रणाम’ कविता रमेश चंद्र दीक्षित द्वारा लिखी गई प्रेरणादायक कविता है, जिसमें उन्होंने भारत देश की स्वतंत्रता प्रति में उन वीरों के योगदान का वर्णन किया है, जिन्होंने भारत देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों को निछावर कर दिया। देश के सम्मान पर किसी तरह की आंच ना आए इसके लिए वह हर समय अपने देश की रक्षा के लिए तैयार रहते हैं। यह वीर देश की सीमा पर रक्षा कर रहे सैनिक हैं तो भारत देश की स्वाधीनता संग्राम में लगे हुए क्रांतिकारी भी थे। इन सभी वीरों को प्रणाम करते हुए ही कवि ने उनकी महिमा का गुणगान किया है।


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