विवाह में लड़कियों को भी पसंद-नापसंद का अधिकार मिलना चाहिए, इस विषय पर अपने विचार लिखिए।

विचार लेखन

विवाह में लड़कियों को भी पसंद-नापसंद का अधिकार

 

विवाह में लड़कियों को पसंद-नापसंद का अधिकार मिलना चाहिए, इस विषय पर हमारा मत बिल्कुल स्पष्ट है। हमारे मत के अनुसार विवाह में लड़कियों को पसंद और नापसंद का अधिकार अवश्य मिलना चाहिए।

विवाह हमारे समाज की एक एक ऐसा संबंध है, जो दो लोगों के पूरे जीवन से संबंधित होता है। दो मनुष्यों यानी स्त्री एवं पुरुष के बीच विवाह उनके पूरे जीवन का बंधन होता है। यह दो-स्त्री पुरुषों को जीवन भर के लिए एक दूसरे के साथ बांध देता है। ऐसी स्थिति में जिस जीवन साथी के साथ पूरा जीवन गुजारना है, उसे अपनी पसंद के अनुसार चुनने का अधिकार सबको होना चाहिए। बिना पसंद के जीवन साथी मिलने पर संभव है कि वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण रहे। इससे स्त्री-पुरुष दोनों का जीवन तनावपूर्ण होगा। इससे बेहतर यह है कि अपनी पसंद के आधार पर विवाह किया जाए।

अब हमारा समाज एक प्रगतिशील समाज बनता जा रहा है। यहाँ पर स्त्री एवं पुरुषों के बीच भेदभाव मिटाने के पूरे प्रयत्न किया जा रहे हैं। यदि लड़कों को अपनी पसंद की लड़की चुनने का अधिकार है, तो लड़कियों को भी विवाह के समय अपनी पसंद-नापसंद चुनने का पूर्ण अधिकार होना चाहिए।

हमारे पहले के समय में लड़कियों से पूछे बिना ही उनका विवाह तय कर दिया जाता था और लड़कियों को उस व्यक्ति के साथ अपना पूरा जीवन निर्वाह करना पड़ता था, जिसे उसने स्वयं नहीं चुना होता था। यह बिल्कुल गलत प्रवृत्ति थी। विवाह किसी के जीवन से संबंधित होता है। यह किसी का व्यक्तिगत मामला है। उस व्यक्ति को नए अनजान व्यक्ति के साथ अपना पूरा जीवन बिताना है, तो उसे नए व्यक्ति को, चाहे वह स्त्री हो अथवा पुरुष हो, दोनों को अपनी पसंद चुनने का पूर्ण अधिकार होना चाहिए। जब पुरुषों को विवाह के समय अपनी पसंद की लड़की चुनने का अधिकार है, तो स्त्रियों को भी वही अधिकार मिलना चाहिए, तभी हमारे समाज से स्त्री-पुरुष के बीच भेदभाव मिटेगा।


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