‘पथ का दीपक बनना’ से क्या अभिप्राय है?

‘पथ का दीपक बनना’ से अभिप्राय दूसरों का मार्गदर्शन करना है। वे लोग जो अज्ञानता के अंधकार में जी रहे हैं, उनके मन की अज्ञानता को दूर करके, उन्हें अज्ञानता के अंधकार से निकलकर, उन्हें ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाना ही पथ का दीपक बनना कहलाता है।

‘पथ का दीपक’ का शाब्दिक अर्थ समझे तो वह दिया जो अंधेरे रास्ते पर रखा होता है। उस दिया से फैले प्रकाश के कारण उस पथ यानि उस रास्ते से गुजरने वाले लोग अपने मार्ग से नहीं भटकते और उन्हें सही रास्ते का ज्ञान होता है। यदि वह यदि वहाँ पर नहीं जल रहा होगा, तो अंधकार के कारण लोग अपने मार्ग से भटक जाते।

‘पथ का दीपक’ ऐसे लोगों के लिए प्रकाश फैलाकर भटकने से रोकता है। यानी वह लोगों को गलत मार्ग पर भटकने से रोकता है।इस तरह वह एक अच्छा कार्य करता है, जिससे लोगों का भला होता है।

‘पथ का दीपक’ शब्द का भाव यही है कि लोगों को पथ का दीपक की तरह ही बनना चाहिए अर्थात गलत मार्ग पर जा रहे लोगों को सही मार्ग दिखाना चाहिए। उन्हें गलत मार्ग पर भटकने से रोकना चाहिए। हम अपने जीवन में ऐसे कार्य करें, ऐसे अच्छे कार्य करें, जिससे लोगों का भला हो, यही पथ का दीपक बनने का सही सार्थक उद्देश्य है।


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