‘तताँरा-वामीरो की कथा’ ने किस पुरानी प्रथा का अंत किया?

‘तताँरा-वामीरो की कथा’ ने उस पुरानी प्रथा का अंत किया, जिसमें अंडमान -निकोबार द्वीप समूह के गाँवों में एक गाँव का युवक या युवती दूसरे गाँव के युवक या युवती से विवाह नहीं कर सकता था।

किन्ही युवक-युवती का आपस में विवाह करने के लिए एक ही गाँव का होना आवश्यक था। ‘तताँरा वामीरो’ की असफल प्रेम कहानी और उन दोनों का प्रेम की खातिर अपने जीवन का बलिदान देने के बाद अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के सभी गाँव के लोगों को अपनी भूल का अहसास हुआ और उसके बाद से सभी गाँवों में उस कुप्रथा का अंत कर दिया गया, जिसके अंतर्गत अलग-अलग गाँव के युवक-युवती एक दूसरे से विवाह नहीं कर सकते थे।

संदर्भ पाठ

‘तताँरा-वामीरो की कथा’ लीलाधर मंडलोई द्वारा लिखा गया एक पाठ है, जिसमें उन्होंने तताँरा और वामीरो नामक दो युवक-युवती की प्रेम कथा का वर्णन किया है। यह दोनों युवक-युवती अंडमान निकोबार द्वीप समूह के दो अलग-अलग गाँवों ‘पासा’ और ‘लपाती’ के निवासी थे।


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