विग्रह और विनोद से क्या अभिप्राय है?

विग्रह और विनोद से अभिप्राय कलह और प्रेम से है।

विस्तार से समझें

विग्रह हिंदी भाषा का शब्द है, जिसके अनेक अर्थ निकलते हैं। व्याकरण की दृष्टि से विग्रह का अर्थ है, यौगिक शब्दों अथवा पदों को एक दूसरे से अलग करना। धर्म एवं भक्ति की दृष्टि से विग्रह का अर्थ किसी देव या ईश्वर आदि की मूर्ति से होता है। ईश्वर के साकार स्वरूप को भी विग्रह कहा जाता है।

यहाँ पर विग्रह का तीसरा अर्थ निकलता है, जिसका अर्थ है कलह करना, लड़ाई करना, झगड़ा करना है। विनोद का अर्थ प्रेम करना, हंसी ठिठोली करना, एक दूसरे से से मजाक करना, हास्य करना है। इस तरह विग्रह एवं विनोद दोनों एक दूसरे के विलोम शब्द है।

जहाँ एक ओर विग्रह से अभिप्राय लड़ाई और झगड़े से है, वहीं दूसरी ओर विनोद से अभिप्राय प्रेम हंसी एवं ठिठोली व हास्य से है। जिस तरह सुख और दुख एक दूसरे के विलोम होकर भी एक दूसरे के साथ युग्म शब्द के रूप में प्रयुक्त किए जाते हैं, उसी तरह विग्रह एवं विनोद दोनों एक दूसरे के विलोम होकर एक दूसरे के साथ युग्म शब्द के रूप में प्रयोग किए जा सकते हैं।


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