कवि पुष्पों की आलस्य और तंद्रा को दूर करने के लिए पुष्पों पर हाथ फेरकर उन्हें जगाना चाहता है। कवि अपने हाथों के कोमल स्पर्श से पुष्पों के अंदर प्राण ऊर्जा भरना चाहता है, ताकि उनके अंदर का आलस्य और तंद्रा पूरी तरह समाप्त हो जाए और वह चुस्त-दुरुस्त प्राणवान एवं पल्लवित और पुष्पित हो जाएं। कवि अपने हाथों के कोमल स्पर्श से उनके अंदर जोश एवं उमंग भरना चाहता है।
कवि पुष्पों को युवाओं का प्रतीक मानता है और उसके अनुसार यह युवा आलस्य और तंद्रा के वश में आकर सोये पड़े हैं। इसलिए वह अपने हाथों के कोमल स्पर्श से इनके अंदर जोश एवं उमंग भरकर उनके आलस्य और प्रमाद को दूर कर देना चाहता है। वह उनकी उन्हें तंद्रा से जगाकर उन्हें कर्तव्य पथ पर चलने के लिए प्रेरित करना चाहता है ताकि उनके अंदर नए उत्साह का संचार हो और वह अपने कर्तव्य की पूर्ति के लिए निकल पड़ें।
विशेष :
‘ध्वनि’ कविता जोकि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला द्वारा लिखी गई है, उस के माध्यम से कवि निराला युवा मन में जोश भरने का प्रयत्न कर रहे हैं। वे आशावादी दृष्टिकोण अपनाकर जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे हैं।
संदर्भ :
(‘ध्वनि’ कविता – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, पाठ 1, कक्षा 11)
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