कालिदास मार्ग उज्जैन में रहने वाली तन्वी की ओर से छात्रावास में रहने वाले भाई को नियमित व्यायाम का महत्व बताते हुए पत्र लिखिए।

अनौपचारिक पत्र लेखन

छात्रावास में रहने वाले भाई को बहन का पत्र

 

दिनांक 28-1-2024,

कालिदास मार्ग ,
उज्जैन, उत्तर प्रदेश – 171011

 

प्रिय अनुज मयंक
स्नेह!

आशा करती हूँ कि तुम छात्रावास में कुशलता से होंगे। हम सब भी यहाँ पर कुशलता से हैं।
मयंक, कल तुम्हारे स्कूल से तुम्हारे प्रधानाचार्य द्वारा भेज पत्र मिला, उसमें लिखा था कि तुम इस वर्ष परीक्षा में प्रथम आए हो और तुम्हें क्रिकेट टीम का कप्तान भी चुना गया है। सुनकर बहुत खुशी हुई पर साथ ही उसमें यह भी लिखा था कि तुम आजकल बार-बार बीमार पड़ रहे हो। कभी तुम्हें सर्दी–जुकाम हो जाता है तो कभी तुम्हारा हाज़मा खराब हो जाता है।

मुझे लगता है कि तुम्हारी प्रतिरक्षा प्रणाली ( immune system ) कमज़ोर हो गया है। मेरे प्यारे भाई तुम्हें याद ही होगा कि जब कोरोना इतना ज्यादा फैला हुआ था तब हमारे पूरे परिवार का कोई भी सदस्य बीमार नहीं पड़ा था जानते हो इसका कारण क्या था?

इसका कारण था कि हम सब लोग नियमित रूप से व्यायाम करते थे और पौष्टिक आहार खाते थे। बाहर के खाद्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल भी नहीं करते थे। मुझे लगता है कि तुम बाहरी खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करने लगे हो , यह बाहर के खाद्य पदार्थ हमारी सेहत के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है क्योंकि ज़्यादातर बाहर के खाद्य पदार्थ मैदे से बने होते हैं और बहुत ज्यादा तले हुए होते हैं। तुम्हें इनका सेवन बंद करना होगा और नियमित व्यायाम करना होगा।
तुमने वह कहावत तो सुनी ही होगी “उत्तम स्वास्थ्य ही सफलता की कुंजी है”।

बड़ी बहन होने के नाते मेरा यह फर्ज बनता है कि मैं तुम्हें नियमित रूप से व्यायाम करने के फायदे बताऊँ। शरीर को स्वस्थ रखने में व्यायाम की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नियमित व्यायाम करने से आपका शरीर बीमारियों से मुक्त हो जाता है और आपका मानसिक संतुलन भी बना रहता है।

व्यायाम हमेशा खुले वातावरण में करना चाहिए क्योंकि  व्यायाम करते समय शुद्ध वायु और रोशनी की ज़रूरत होती है। नियमित रूप से व्यायाम करने से मानसिक संतुलन में वृद्धि होती है, आलस्य दूर होता है और याददाश्त बढ़ती  है।

व्यायाम करना हमारे शरीर के लिए उतना ही आवश्यक होता है जितना की भोजन करना। व्यायाम करने से शरीर को शक्ति और स्फूर्ति मिलती है और शरीर को संतुलित रखने जैसी जीवन की कोई बड़ी अनमोल चीज नहीं होती। आशा करती हूँ कि तुम अपनी बड़ी बहन की बात समझ गए होंगे और तुम अब नियमित रूप से व्यायाम करोगे। अपना ध्यान रखना।

तुम्हारी बड़ी बहन,
तन्वी ।


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