ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से आगाह करते हुए इसकी रोकथाम हेतु क्या क्या प्रयास किए जा सकते है इस विषय पर अपनी सखी को पत्र लिखिये?

अनौपचारिक पत्र

ग्लोबल वार्मिंग पर सखी को पत्र

 

मकान नं 24, ग्रीन पार्क,
खलिनी, शिमला -171002

दिनांक : 2 अप्रेल 2024

 

प्रिय सखी रंजना
सप्रेम,

आशा करती हूँ कि तुम अपने स्थान पर कुशल मंगल होगी। मैं भी यहाँ अपने परिवारजनों सहित कुशलता पूर्वक हूँ। तुम्हारा पत्र मिला था, पत्र पढ़ कर बहुत प्रसन्ता हुई, परंतु मैं तुम्हारे पत्र का उत्तर नहीं दे पाई।

बहुत दिनों से तुम्हें पत्र लिखने का सोच रही थी लेकिन समय ही नहीं मिल पाया क्योंकि मैं नाना–नानी के घर गई थी। मेरे नाना जी एक वैज्ञानिक हैं और उन्होंने मुझे ग्लोबल वार्मिंग के बारे मे बताया। मुझे तो सुन कर बहुत डर लगा।

क्या तुम्हें मालूम है कि जब वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ने लगा है। इसके कारण ओज़ोन परत में छेद होने के कारण तापमान में वृद्धि हुई है। ओज़ोन परत में छेद होने के कारण धरती का तापमान बढ़ने लगा है। जिस कारण अनेक रोगों का खतरा भी बढ़ गया है और कई प्राकृतिक आपदाएँ मुँह खोले खड़ी हैं। जैसे – बाढ़, सूखा, हिमक्षरण आदि।

ग्लोबल वार्मिंग से ना केवल हम मनुष्य ही बल्कि जीव–जंतु भी प्रभावित हो रहे हैं। बढ़ते तापमान के कारण गलेशियर पिघलने लगे हैं, जिससे धरती का जल-स्तर बढ़ने लगा है। इसी के परिणाम स्वरूप एक समय में समुद्र के किनारे बसने वाले नगर जलमग्न हो जाएँगे।

इस समस्या से निपटने के लिए जीवाश्म इंधनों का प्रयोग कम करना होगा। वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोत तलाशने होंगे। क्लोरो–फ़्लोरो कार्बन्स की मात्रा पर रोक लगानी होगी। वृक्षारोपण को बढ़ावा देना होगा।

वन संरक्षण के लिए सभी को मिल–जुल कर कार्य करना होगा तभी हम सब सुरक्षित हो पाएंगे, वरना वो दिन दूर नहीं जब हम सब भी जलमग्न हो जाएंगे। हो सके तो तुम भी अपने ज्यादा से ज्यादा दोस्तों को इस बारे में बताना।

अपने माता–पिता को मेरी ओर से प्रणाम कहना और अपने छोटे भाई श्याम को मेरी तरफ से स्नेह देना।

तुम्हारी सखी,
गरिमा ।


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