छात्र की अनुशासनहीनता के कारण विद्यालय में आए उसके पिता तथा प्राचार्य के मध्य संवाद लिखिए ।

संवाद लेखन

एक पिता का प्रधानाचार्य के साथ संवाद

 

पिता : (बड़ी ही विनम्रता के साथ) नमस्कार ! प्राचार्य जी, आपने कल विद्यालय आने के लिए संदेश भेजा था, बताइये क्या बात है ?

प्राचार्य : श्रीमान, क्या आप जानते हैं कि आपके बेटे ने कल क्या किया है ?

पिता : (चौंक कर) नहीं श्रीमान, मुझे कुछ नहीं पता, क्या किया इस नालायक ने?

प्राचार्य : आपके बेटे ने कल नौवीं कक्षा के छात्र के साथ मार-पीट की है और उसे इतना मारा कि उसे अस्पताल ले जाना पड़ा।

पिता : क्या कह रहे हैं श्रीमान, मेरा बेटा तो बड़ा ही सभ्य स्वभाव का लड़का है और वह किसी के साथ मार-पीट नहीं कर सकता।

प्राचार्य : तो श्रीमान, मैं क्या झूठ बोल रहा हूँ, विद्यालय के कई छात्र और अध्यापक इस घटना के साक्ष्य हैं और आप कहते हैं तो मैं आप के सामने उन्हें बुलाता हूँ और आप उन से पूछ लें कि यह सत्य है कि नहीं।

पिता: (शर्मिंदा होते हुए) नहीं-नहीं महोदय, मैं आप के कथन पर शक नहीं कर रहा हूँ, बस मैं इस बात से अचंभित हूँ कि जो लड़का घर में एक शब्द नहीं बोलता, वह ऐसा भी कर सकता है।

प्राचार्य : श्रीमान जी, मुझे तो यह भी ज्ञात हुआ है कि आपका बेटा गलत संगत में पड़ चुका है और छुट्टी के बाद वह अपने मित्रों के साथ नशे करते भी देखा गया है।

पिता : महोदय, मुझे यह सब अभी पता लग रहा है और अगर मुझे पता होता तो मैं इस बारे में ज़रूर कुछ करता, लेकिन आज तक किसी ने मुझे इस बारे में कुछ नहीं बताया।

प्राचार्य: मुझे आप से हमदर्दी है, लेकिन एक प्राचार्य होने के नाते मुझे विद्यालय में अनुशासन बना कर रखना है और इस कारण मुझे आपके बेटे को विद्यालय से निष्कासित करना पड़ेगा।

पिता : महोदय, कृपया ऐसा मत कीजिए, मेरे बेटे का भविष्य बर्बाद हो जाएगा और मैं इस गलती की ज़िम्मेदारी लेता हूँ क्योंकि शायद बिन माँ के बच्चे को मैं समय और अच्छे संस्कार न दे पाया।

प्राचार्य : लेकिन आप कैसे कह सकते हैं कि वह आगे ऐसा नहीं करेगा।

पिता : मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आगे भविष्य में मेरा बेटा ऐसी कोई गलती नहीं करेगा और उसे सुधारने के लिए मैं हर संभव प्रयास करूंगा।

प्राचार्य : ठीक है लेकिन उसे सब के सामने कल उस लड़के से माफी मांगनी होगी।

पिता: सही है श्रीमान, आप जैसा कहेंगे, वह वैसा ही करेगा।

प्राचार्य : कृपया आप अपने लड़के का ध्यान रखें और उसके साथ वक्त गुजारें ताकि वह ऐसी गलत गतिविधियों में न लिप्त हो।

पिता : जी, मैं अब ऐसा ही करूंगा, धन्यवाद।


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