एक अभिनेता और एक रिपोर्टर के बीच हुए संवाद को लिखें।

हिंदी संवाद लेखन

अभिनेता और रिपोर्टर के बीच संवाद

अभिनेता और रिपोर्टर के बीच संवाद इस प्रकार है :

रिपोर्टर :- (दरवाज़ा खटखटाते हुए) श्रीमान जी  क्या मैं अंदर आ सकता हूँ ।

अभिनेता :- (शायराना अंदाज में) आइए–आइए हम तो कबसे आपके इंतज़ार में पलकें बिछाए बैठे हैं ।

रिपोर्टर :- (हाथ जोड़ कर) श्रीमान जी (sir) आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जो आपने अपने कीमती समय में से मेरे लिए अपना वक्त निकाला ।

अभिनेता :- (अपने बालों पर हाथ फेरते हुए) अरे कैसी बाते कर रहे हैं ,आज हम जहाँ पहुंचे है वहाँ पर पहुंचाने में आपका भी बहुत बड़ा हाथ है ।

रिपोर्टर :- (मुसकुराते हुए) श्रीमान जी अगर आपको एतराज ना हो तो क्या मैं आपसे कुछ व्यक्तिगत बातें पूछ सकता हूँ ।

अभिनेता :- हाँ-हाँ जरूर पूछिए क्या पूछना चाहते हैं आप?

रिपोर्टर :- श्रीमान आप तो बड़े-बड़े घरों में रहते हैं, गाड़ियों में घूमते हैं, कुर्सी मेज़ पर बैठ कर छुरी, कांटे और चम्मच के साथ ही खाना खाते हो ।  अगर कभी कुछ दिन आपको इन सुविधाओं के बिना रहना पड़े तो क्या आप रह पाएंगे ?

अभिनेता :- (ज़ोर–ज़ोर से हँसते हुए) कमाल हैं आप भी। आपको क्या लगता है कि क्या ये सब कुछ मुझे विरासत में मिला है। नहीं जनाब यह सब तो रात–दिन की मेहनत का नतीजा है।

रिपोर्टर :- तो फिर कुछ अपने बचपन के बारे में बताइए ।

अभिनेता :- (बीते समय को याद करते हुए) मैं एक बहुत ही गरीब परिवार से था।  मेरे पिता जी किसान थे।  मेरी माँ कपड़े सिलाई का काम करती थी। हमारे घर में बिजली भी नहीं थी और तो और तो और हमारा एक ही कमरे का घर था। घर की छत भी बरसात में टपकती थी।

रिपोर्टर :- फिर तो आप उस समय को कभी याद नहीं करते होंगे, क्योंकि आपका जीवन तो बहुत तकलीफ में बीता है।

अभिनेता :- नहीं, मैं उस समय को कभी भी नहीं भुलाना चाहता हूँ क्योंकि मेरा बचपन मुझे मेरे माता-पिता के संघर्ष की याद दिलाता है, जो उन्होंने मेरे लिए किया था । बल्कि मैं तो अपने बच्चों को भी अपने बचपन के बारे में बताता हूँ और उस जगह पर भी लेकर जाता हूँ, जहाँ पर मेरा बचपन बीता है। हम सब आज भी कभी-कभी घर पर ज़मीन पर बैठ कर हाथ से बिना चम्मच के खाना भी खाते हैं ।

रिपोर्टर :- अभिनेता जी, तो आप अपनी सफलता का श्रेय किसे देते है?

अभिनेता :- (आँखों में आँसू भरे थे) मेरी सफलता का सारा श्रेय मेरे माता-पिता को जाता है, आज मैं जो कुछ भी हूँ उनकी ही वजह से हूँ।


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