अफ़ासानी निकितन एक रूसी व्यापारी था जो पंद्रहवीं शताब्दी में भारत आया था। उस दक्षिण भारत में विजयनगर साम्राज्य जैसे साम्राज्य थे और राजा कृष्णदेव राज के पूर्ववर्ती राजा का शासन था।
अफ़ासानी निकितन सन 1466 से 1475 के बीच रूस से अपने विशेष विदेश यात्रा पर निकला था। 8 वर्षों की अपनी विदेश यात्रा के काल में वह 3 वर्षों तक भारत रहा। वह जब रूसे व्यापार हेतु चला दो रास्त में वह कई बार लूटा गया। बाद में उसने विदेश यात्रा करने निर्णय लिया। उसने भारत के बारे में काफी कुछ सुन रखा था। वह रूस से चलकर जॉर्जिया, आर्मेनिया और ईरान के रास्ते भारत आया था।
अफ़ासानी निकितन का भारत में पहला पड़ाव महाराष्ट्र में मुंबई के निकट ‘चौपा’ नामक गाँव था। यह एक समुद्र तटीय गाँव था। जहाँ पर अफ़ासानी निकितन ने अपना पहला कदम रखा। वहाँ से उसने भारत में कई जगह की यात्राएं की और अपने साथ वह जो सामान लाया था, उसने वह सामान बेचा। अपने साथ वह एक अच्छी नस्ल का घोड़ा भी लाया था क्योंकि उस समय भारत में अच्छी नस्ल के घोड़ों की कमी होती थी और भारत के बाहर से अरबी व्यापारी आकर भारत में उच्च कोटि की नस्ल के घोड़े बेचते थे। अफासानी निकितन ने भी अपने साथ एक अच्छी नस्ल का घोड़ा लाकर, उसने वह घोड़ा भारत में बेचा।
अफ़ासानी निकितन 3 वर्षों तक भारत में रहा और उसने अपनी भारत यात्रा पर एक पुस्तक भी लिखी, जिसका नाम ‘तीन समुद्र पार का सफरनामा’ है। मूल रूप से रूसी भाषा में लिखी गई इस पुस्तक में अफ़ासानी निकितन ने अपनी भारत यात्रा का वर्णन किया है। उसने अपनी भारत यात्रा के दौरान विजयनगर साम्राज्य, गुलबर्गा, बीदर, गोलकुंडा जैसे राज्यों की यात्रा की, क्योंकि उसने इन सभी जगह का वर्णन अपनी पुस्तक में किया है। इस तरह अफ़ासानी निकितन जब भारत आया था तो उस समय दक्षिण भारत में विजयनगर साम्राज्य का शासन था।
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