पद : मीरा (कक्षा-10 पाठ-2 हिंदी स्पर्श 2) (हल प्रश्नोत्तर)

NCERT Solutions (हल प्रश्नोत्तर)

पद : मीरा (कक्षा-10 पाठ-2 हिंदी स्पर्श भाग 2)

PAD : Meera (Class-10 Chapter-2 Hindi Sparsh 2)


पद : मीरा

पाठ के बारे में…

प्रस्तुत पाठ में मीराबाई द्वारा रचित पदों की व्याख्या की गई है। यह पद उन्होंने अपने आराध्य श्रीकृष्ण को संबोधित करके उन्हें समर्पित किए हैं। मीराबाई अपने आराध्य श्री कृष्ण से मनुहार कर रही है और उनके प्रति लाड़ भी जताती हैं। अवसर आने पर वह उन्हें उलाहना भी देती हैं। एक तरफ वह उनकी क्षमताओं का गुणगान करती हैं, उनका नित्य स्मरण करती है और दूसरे ही क्षण में उन्हें उनके कर्तव्य याद दिलाने की चेष्टा भी करती हैं। पाठ में मीराबाई के दो पद प्रस्तुत किए गए हैं। दोनों पद उनके ग्रंथ मीरा ग्रंथावली भाग 2 से संकलित किए गए हैं।



रचनाकार के बारे में…

मीराबाई भक्तिकाल की एक प्रसिद्ध संत कवयित्री थीं, जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति सगुण भक्ति धारा का अनुसरण किया। वह मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की आध्यात्मिक प्रेरणा रही हैं और स्त्री कवयित्रियों में उनका स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने हिंदी (ब्रज) और गुजराती तथा राजस्थानी मिश्रित भाषाओं के पदों की रचना की।

मीराबाई का जन्म राजस्थान के जोधपुर के चोकड़ी (कुड़की) गाँव में सन 1530 ईस्वी में हुआ माना जाता है। मात्र 13 वर्ष की आयु में ही उनका विवाह महाराणा सांगा के पुत्र भोजराज से कर दिया गया था, लेकिन वह बचपन से ही श्रीकृष्ण को अपना आराध्य बना चुकी थीं और उन्हें अपना पति मानती थीं। विवाह के कुछ वर्ष बाद उनके पति का देहांत हो गया। फिर उसके बाद उन्होंने पूरी तरह अपना जीवन श्री कृष्ण की आराधना में ही समर्पित कर दिया। उन्होंने अपना घर परिवार त्यागकर वृंदावन में डेरा डाल लिया और गिरधर गोपाल अर्थात श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति भाव से समर्पित हो गईं।

उनके गुरु प्रसिद्ध संत रविदास (रैदास) थे। मीराबाई की कुल सात-आठ कृतियां ही उपलब्ध हैं, जिनमें उन्होंने अनेक पदों की रचना की है। सभी पद श्री कृष्ण के प्रति भक्ति भाव से ओतप्रोत है। मीराबाई के पदों में ब्रज, राजस्थानी, गुजराती भाषा का मिश्रण पाया जाता है। सन 1546 ईस्वी में मात्र 43 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।



हल प्रश्नोत्तर

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

प्रश्न 1 : पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है?

उत्तर : मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती उस प्रकार की है, जिस तरह हरि या श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की लाद की भरी सभा में रक्षा की। उन्होंने द्रौपदी को वस्त्र प्रदान करके उन्हें लज्जित होने से बचाया था। जिस प्रकार उन्होंने नरसिंह का रूप धारण करके भक्त प्रह्लाद को बचाया और हिरणकश्यप का वध किया। जब मगरमच्छ ने हाथी का पैर अपने मुंह में जकड़ लिया था, तब उन्होंने हाथी की मगरमच्छ से रक्षा करके उसके प्राण बचाए। उसी प्रकार आप भी संकट की घड़ी में मेरी रक्षा करो और मुझे पीड़ा से मुक्त करो।


 

प्रश्न 2 : दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : दूसरे पद में मीरा श्याम की चाकरी इसलिए करना चाहती हैं, क्योंकि वह हर समय श्याम के दर्शन करना चाहती हैं, उनके निकट रहना चाहती हैं। मीरा चाहती हैं कि उन्हें श्याम यानी श्रीकृष्ण की सेविका बनने का अवसर प्राप्त हो जाए। जब वह कृष्ण की सेविका बन जाएंगी तो बाग-बगीचे लगाएंगीजिसमें श्रीकृष्ण घूमेंगे।

इस तरह सुबह-सुबह कृष्ण के सुंदर मनोहारी रूप के दर्शन करने को मिला करेंगे। वह श्रीकृष्ण कुंज गलियों मे में श्रीकृष्ण की लीला के गीत गाना चाहती हैं ताकि उसका लाभ उठा सकें। श्रीकृष्ण की भक्ति को वह अपनी जागीर मानती हैं, और इस जागीर को हमेशा अपने पास संभाल कर रखना चाहती हैं। वह हर पल हर समय श्रीकृष्ण के पास रहना चाहती हैं, इसलिए वह श्याम यानी श्रीकृष्ण की चाकरी करना चाहती हैं।


 

प्रश्न 3 : मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रुप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?

उत्तर : मीरा ने श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य का वर्णन बड़े ही सुंदर तरीके से किया है। मीरा कहती हैं कि श्रीकृष्ण के सर पर मोर के पंखों का मुकुट है, जो उनके सुंदर मुखड़े पर बेहद शोभायमान प्रतीत हो रहा है। वह पीतांबर यानी पीले वस्त्र धारण किए हुए हैं और उनके गले में फूलों की वैजयंती माला पड़ी हुई है। इस तरह उनका रूप बेहद दिव्य एवं मनोहारी लग रहा है। वह अपने इस सुंदरतम रूप में जब वे बाँसुरी बजाते हुए जब गाय चराते हैं, तो उनका रूप सौंदर्य और अधिक दिव्य एवं भव्य हो जाता है।


 

प्रश्न 4 : मीराबाई की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।

उत्तर : मीराबाई की भाषा शैली मिश्रित भाषाओं की शैली रही है। उन्होंने अपने पदों में मिश्रित भाषा का प्रयोग किया है। मीराबाई मूलतः राजस्थान की रहने वाली थी, इसलिए उनके पदों में राजस्थानी भाषा का सबसे अधिक प्रभाव दिखाई पड़ता है। उन्होंने अपने जीवन का एक लंबा समय ब्रज में बिताया था और इसलिए उनके पदों में ब्रजभाषा का भी अच्छा खासा प्रभाव दिखाई देता है। इसलिए उनके पदों में राजस्थानी एवं ब्रजभाषा का मिश्रित प्रभाव दिखाई देता है। इसके अतिरिक्त मीराबाई के पदों में गुजराती शब्दों का भी प्रयोग किया गया है।

मीराबाई के पदों की भाषा शैली सरल एवं सहज है, जो तत्कालीन समाज की आम बोलचाल की भाषा थी और लोगों को सरल रूप से समझ में आ जाती थी। इसी कारण उनके पद बेहद लोकप्रिय हुए। मीराबाई के पदों में भाव भरा हुआ है और उनके पद प्रवाहमय है। उनके पद में भक्ति रस की प्रधानता है अलंकारों का भी प्रयोग उन्होंने कुशलता से किया है। उनके पदों में अनुप्रास, पुनरुक्ति प्रकाश, रूपक, उपमा आदि अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है।


 

प्रश्न 5 : मीरा श्रीकृष्ण को पाने के लिए क्या-क्या कार्य करने को तैयार हैं?

उत्तर : मीराबाई श्री कृष्ण को पानी के लिए अनेक तरह के यतन-जतन करने के लिए तैयार हैं। वह  श्रीकृष्ण को पाने के लिए किसी भी तरह का कार्य करने को तैयार हैं। वह श्रीकृष्ण की सेविका बंद कर उनकी हर पल सेवा करना चाहती हैं। वह श्रीकृष्ण को सुबह सुबह घूमने भ्रमण करने के लिए बाग बगीचे लगाना चाहती हैं, ताकि सुबह-सुबह श्रीकृष्ण उन बाग-बगीचों में घूम सकें और वह श्रीकृष्ण के सुंदर रूप का दर्शन कर सकें।

वह वृंदावन की गलियों में श्रीकृष्ण की लीलाओं के गीत गाना चाहती हैं। वह ऊँचे ऊँचे महलों में बड़ी-बड़ी खिड़कियां बनवाना चाहती हैं, ताकि वह उन खिड़कियों से श्रीकृष्ण के सुंदर मनोहारी रूप का जब चाहे तब दर्शन कर सकें। वह चाहती हैं कि वे कुसुम्बी रंग की साड़ी पहनकर आधी रात को श्रीकृष्ण से मिलें और उनके दर्शन करें। इस तरह वह श्रीकृष्ण को पाने के लिए अनेक तरह के प्रयास करना चाहती हैं।



(ख) निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

1. हरि आप हरो जन री भीर। द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रुप नरहरि, धर्यो आप सरीर।
2. बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।
3. चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।

उत्तर : सभी पंक्तियों का काव्य सौंदर्य इस प्रकार होगा :

1. हरि आप हरो जन री भीर।
   द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
   भगत कारण रुप नरहरि, धर्यो आप सरीर।

काव्य सौंदर्य : इन पंक्तियों के माध्यम से मीराबाई अपने आराध्य श्रीकृष्ण को अपनी रक्षा के लिए पुकार रही हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण को पुकारने के लिए अनेक तरह के उदाहरण दिए हैं। वह कहती हैं कि जिस तरह श्रीकृष्ण ने द्रौपदी के वस्त्र बढ़ाकर उनकी लाज की रक्षा के लिए, जिस तरह उन्होंने नरसिंह रूप धारण कर प्रह्लाद की रक्षा की, उसी तरह आप मेरी भी संकट की इस घड़ी में मेरी रक्षा करो।

पदों में मीराबाई ने राजस्थानी एवं ब्रज भाषा की मिश्रण भाषा का प्रयोग किया है।  पंक्तियों के अंत में ‘र’ वर्ण की ध्वनि का बार-बार प्रयोग हुआ है। हरि शब्द में श्लेष अलंकार का प्रयोग किया है, क्योंकि ‘हरि’ के यहां पर अनेक अर्थ निकलते हैं।

2.  बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।
     दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।

काव्य सौंदर्य : इन पंक्तियों में भी मीराबाई श्री कृष्ण को अपनी रक्षा के लिए पुकार रही है। वह कहती हैं कि जिस तरह उन्होंने मगरमच्छ द्वारा गजराज को जकड़ लेने के बाद डूबते हुए गजराज को बचाया और उसके प्राणों की रक्षा करें। वैसे ही आपकी दासी मीराबाई भी आपसे से प्रार्थना करती है कि आप मेरे संकट की घड़ी में मेरी रक्षा करो।

पंक्तियों में मीराबाई ने दास्य भाव से भरी भक्ति का प्रदर्शन किया है। उन्होंने स्वयं को श्रीकृष्ण की दासी के रूप में प्रस्तुत किया है। पदों की भाषा ब्रज एवं राजस्थानी भाषा का मिश्रण है। ‘काटी कुंजर’ शब्द में अनुप्रास अलंकार की छटा बिखर रही है। पद की भाषाशैली सरल एवं सहज है।

3.  चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
    भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।

काव्य सौंदर्य : इन पंक्तियों में मीराबाई श्रीकृष्ण के दर्शन करने के लिए, उनका निकटता पाने के लिए उनकी चाकरी करने तक को तैयार हैं। वह किसी भी शर्त पर श्रीकृष्ण की निकटता पाना चाहती हैं, ताकि वह रोज उनके दर्शन कर सकें। रोज उनके नाम का स्मरण कर सकें और उनके भक्ति की जागीर को पा सकें।

इन पंक्तियों में भी मीराबाई ने स्वयं को श्रीकृष्ण की दासी के रूप में प्रस्तुत किया है। पदों की भाषा ब्रज और राजस्थानी भाषा का मिश्रण है। खरची और सरसी शब्द तुंकात शब्दों का आभास दे रहे हैं। पक्ति में ‘भाव भगती जागीरी’ में अनुप्रास अलंकार और रूपक अलंकार की छटा बिखर रही है।



भाषा अध्ययन

प्रश्न 1 उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप लिखिए-
उदाहरण − भीर − पीड़ा/कष्ट/दुख; री − की
चीर_______ बूढ़ता ________ धर्यो _______ लगास्यूँ _______ कुण्जर ________ घणा ________ बिन्दरावन _______ सरसी ________ रहस्यूँ _______ हिवड़ा _______ राखो _______ कुसुम्बी _______

उत्तर : उदाहरण के आधार पर पाठ में आए शब्दों के प्रचलित रुप इस प्रकार होंगे :
उदाहरण भीर − पीड़ा/कष्ट/दुख; री − की
चीर : वस्त्र
बूढ़ता : डूबता
धर्यो : रखना
लगास्यूँ  : लगाना
कुण्जर : हाथी
घणा : बहुत
बिन्दरावन : वृंदावन
सरसी  : अच्छी
रहस्यूँ  :  रहना
हिवड़ा  : हृदय
राखो  : रखना
कुसुम्बी  : लाल अथवा केसरिया


योग्यता विस्तार

प्रश्न 1 मीरा के अन्य पदों को याद करके कक्षा में सुनाइए।

उत्तर : ये एक प्रायोगिक कार्य हैं, विद्यार्थी मीरा के पदों को अलग-अलग स्रोतों से संकलिक करके उन्हें याद करें और कक्षा में सुनाएं।

प्रश्न 2 यदि आपको मीरा के पदों के कैसेट मिल सके तो अवसर मिलने पर उन्हें सुनिए।

उत्तर : आजकल कैसेट मिलना संभव नही है। इसलिए विद्यार्थी सीडी अथवा पेनड्राइव अथवा इंटरनेट से मीरा के पदों के आडियों डाउनलोड करके उन्हे सुनें।


परियोजना

प्रश्न 1 मीरा के पदों का संकलन करके उन पदों को चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।

उत्तर : मीरा के अलग-अलग पदों का संकलन करके चार्ट पर लिखें और भित्ति पत्रिका पर लगाएं।

प्रश्न 2 पहले हमारे यहांँ 10 अवतार माने जाते थे। विष्णु के अवतार राम और कृष्ण प्रमुख हैं। अन्य अवतारों के बारे में जानकारी प्राप्त करके एक चार्ट बनाएं।

उत्तर : भगवान विष्णु के दस अवतार इस प्रकार हैं…

  1. मत्स्य अवतार
  2. वराह अवतार
  3. कच्छप अवतार
  4. नरसिंह अवतार
  5. वामन अवतार
  6. परशुराम अवतार
  7. श्री राम अवतार
  8. श्री कृष्ण अवतार
  9. भगवान बुद्ध अवतार
  10. कल्कि अवतार

पद : मीरा (कक्षा-10 पाठ-2 हिंदी स्पर्श भाग 2) (NCERT Solutions)

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